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शुक्रवार, 15 मार्च 2019

प्रतिभा हैं तो ज़िद रखो/a hindi inspirational story

प्रतिभा हैं तो ज़िद रखो : hindi motivational story on student 


A Hindi inspirational story for your willingness

Inspirational quotes in Hindi/motivational thought in Hindi
प्रतिभा है तो ज़िद रखो/Hindi inspirational story

प्रतिभा है तो ज़िद रखो का यह तात्पर्य है कि यदि आपके पास कोई काबिलियत है या कोई विशेष गुण है तो उसे सबके सामने रखिए,उसे और सवारिए और ये तभी संभव हो सकता है जब आप परिस्थितियों से ना डगमगाए.....


अपने प्रतिभा के शौर्य को सबके सामने लाने तक का सफर तय करना इतना आसान नहीं होता और ख़ास तौर पर तब जब आपके घर को आपकी सबसे ज्यादा जरूरत हो यानि जब घर की आर्थिक स्थिति ठीक न हो,,

 कहानी शुरू होती है
एक गांव की बात है जहां एक परिवार रहता था घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी मुखिया का नाम अवधेश था जिसका एक ही लड़का रोहन था तथा उसकी पत्नी नाम रेखा था। अवधेश किसी तरह अपने परिवार का पालन पोषण करता था,कहते है ना गरीब परिवार का ख्वाब ये होता है कि कल की रोटी कैसे मिलेगी,रोहन धीरे धीरे बड़ा हो चुका था पर उसकी पढ़ाई गरीबी की वजह से ज्यादा नहीं हो पाई,,पर कहते है ना कि कीचड़ में कमल खिलता है ये बिल्कुल ठीक है क्यूंकि रोहन की सोच बिल्कुल अलग थी उसे लिखना बहुत पसंद था वो लेख लिखा करता था,अवधेश की धीरे धीरे उम्र हो रही थी उसे पता था कि रोहन को लेखन पसंद है और वो लेखक बनना चाहता है इकलौता बेटा था रोहन,सभी मां बाप  अपनी संतान को खुश देखना चाहते हैं, वे रोहन को काम पर नहीं भेजते थे दिन कट रहे थे,,,

रोहन काफी अच्छे अच्छे लेख लिखने लगा था पर परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने की वजह से और घर में बड़ा बेटा होने की वजह से उनको काफी भला बुरा सुनना पड़ता था, यहां तक कि उनके पड़ोसी तक उनसे सीधे मुंह बात नहीं करते थे,यदि शादी भी पड़ती तो इन्हें बुलावा भेजना जरूरी नहीं समझते थे, दोस्तों ये काफी कष्ट देने वाले पल होते है जब आप अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों के बीच खुद को नीचा महसूस करने लगते हैं,,,

रोहन को ये सुनने को मिलता था कि पेट तो पाला नहीं जाता चला है लेखक बनने अरे ये ख्वाब अमीर देखा करते है तेरे जैसे कंगाल नहीं बड़ा चला है परिवर्तन के रहा पर जा अपने मा बाप को सम्हाल,रोहन को काफी दुख होता है वो कहता है कि मुझे इस गांव का सबसे अमीर आदमी बनना है और अपने परिवार को उचित सम्मान दिलाने है,एक शाम अवधेश काम से वापस आता है उसकी तबीयत खराब हो जाती है और वो एक दो दिन घर पर ही पड़ा रहता है उसकी बीमारी तो ठीक हो जाती है पर उसकी ज़िन्दगी लेकर अवधेश मर जाता है,, परिवार पर जैसे अंधकार के बादल छा गए किसी तरह उसका दाह संस्कार होता है,अब रोहन के पास एक ही रास्ता था कि वो कोई काम पकड़े और अपनी मा का ख्याल रखे और अपने ख्वाब का गला दबा दे,

लेकिन उस अपने आप पर विश्वास था कि उसे बस एक प्लेटफॉर्म मिल जाए तो वो अपने कौशल के शौर्य को सबको दिखा देगा,एक दिन-

रोहन बोलता है- मां मै चाहता था कि मै बड़ा आदमी बन कर पिता जी को और आपको सारी सुख सुविधाएं दूंगा पर मैंने इस गरीबी की वजह से अपने पिता को खो दिया अब मै आपको नहीं खो सकता चलिए हम यहां से चलते है शहर में मै काम करूंगा आपकी शेवा भी,

मां की आंखों में आंसू थे उसने बोला मै शहर नहीं जा सकती यहां अपने लोग है घर है तुम भी यही रही मेरी आंखों के सामने तुम्हारी मां है अभी तुम्हारा पालन कर देगी तुम चिंता मत करो,,

रोहन कहता है- किस अपने कि बात कर रही है आप ये वही लोग है जिन्होंने पिता जी को आ जीवन बुरा भला सुनाया है और ये वही लोग है जो इंसान को नहीं उसकी पोजिशन को देखते है और उसको उस हिसाब से इज्ज़त देते है,रोहन किसी तरह अपनी मां को समझा कर उनके साथ शहर पहुंचता है..

अब उसके सामने सबसे बड़ी दिक्कत थी कि वो रहेगा कहा और करेगा क्या,रहने के लिए कमरा चाहिए पर उतने पैसे नहीं थे पर भरोसा था सब ठीक हो जाएगा वो एक रुकते हैं वहा पर एक ट्रक लकड़ी के पल्ले लोड किए हुए खड़ा था और उसे उतरवाना चाहता था रोहन ट्रक वाले से बात करता है क्या मै इसे उतार दूं, ट्रक वाला बोलता है ठीक है उसकी मां एक जगह पर बैठ जाती है और रोहन पल्ले उतारने लगता है उसकी मा उसे देख रही थी रोहन को पहली बार काम करते हुए वो इकलौते बेटे को दोस्तों उनकी आंखों में आंसू आ जाते है पर ये उम्मीद के थे,उधर काम खत्म होता है ट्रक वाला रोहन को पैसे देता है रोहन वो पैसे लाकर अपनी मां को देता है 

और बोलता है- ये लो मां इस शहर ने हमारा स्वागत किया है वो जाते है और एक छोटा सा कमरा लेते है,अगले दिन रोहन काम की तलाश में जाता है पर उस १,२ दिन कोई काम नहीं मिलता सच कहते है जब परिस्थितियां वितरित हो तो रास्ते भी नज़र नहीं आते लेकिन रोहन कि इच्छा इतनी बड़ी थी कि कोई भी परिस्थिति उस हरा नहीं सकती थी उस एक काम मिल जाता है कार एजेंसी में सफ़ाई करने के लिए,वो रोज़ काम पर जाता और शाम को वापिस कमरे पर जाता,काम के दौरान उसका एक मित्र बन जाता है रवि वो दोनो अपनी बातें आपस में सांझा करते थे,रवि को जब यह पता चलता है कि रोहन अच्छा लिख लेता है और लेखक बनना चाहता है तो उसने रोहन को बोला भाई तू अपने कमरे पर से ही ये काम शुरू कर दे,रोहन व्याकुल होकर पूछता है कैसे? 

रवि बोलता है- शहर में बहुत लोगो को लेख लिखना रहता है पर समय के आभाव में वो लिख नहीं पाते तो उनका काम तू कर दिया कर इससे तुम्हारी लेखनी भी अच्छी हो जाएगी और पैसे भी मिल जाएंगे रोहन को सुझाव काफी अच्छा लगता है 

वो कमरे पर आता है और कुछ टेम्पलेट छपवाकर चिपका देता है कि लेखन या लेखन सजावट जैसे सेवा के लिए सम्पर्क करे कुछ दिन तक कोई उत्तर नहीं मिलता है,पर एक सुबह वो कमरे पर रहता है तभी दरवाजे पर खटखटाहट की आवाज आती है वो दरवाजा खोलता है और देखता है एक आदमी था आदमी ने कहा क्या यहां लेखन होता है रोहन पूरी तरह सुन्न हो गया खुशी के मारे उसकी आवाज नहीं निकल रही थी क्यूंकि जीवन में पहली बार उस एक आशा की उम्मीद मिली थी उसने खुद को सम्हाल और बोला जी हां यहां लेखन होता है आपको क्या लिखवाना है,,,

आदमी बोलता है- मुझे कॉलेज के दीवारों पर उपदेश लिखवाना है तो मै चाहता हूं आप अच्छे अच्छे उपदेश लिखे और पैसे मै आपकी लेखनी के अनुसार दूंगा,रोहन मान जाता है,वो बहुत खुश था वो काम पर जाता है और सोचता है कितनी जल्दी शाम हो की मै घर जाऊं और लेखन करूं,शाम होती है वो घर आता है वो लेख लिखने लगता है १ दिन बाद वो आदमी आता है उसी समय और पूछता है मेरा काम हुआ रोहन कहता है हां जी आपका काम हो गया ये देख लीजिए उसने वो लेख आदमी को दिखाया आदमी देखता का देखता रह गया क्यूंकि रोहन ने बहुत ही अच्छे लेख लिखे थे आदमी ने उसे अच्छे पैसे दिए और चला गया,,धीरे धीरे रोहन को उस क्षेत्र में सब जानने लगे थे उसने अपना काम छोड़ दिया और पूरा समय लेखन में देने लगा और एक दफ़्तर खोल ली,,

एक दिन की बात है रोहन अपने दफ़्तर में था उसे एक बहुत बड़ी कंपनी से फोन आता है कि आपका मेल हमे मिला हम एक प्रतियोगिता करा रहे हैं अपनी कंपनी के लिए जिसमें बहुत सारे लेखक हिस्सा ले रहे हैं पर एक ही लेखक को लिया जाएगा,रोहन तैयार हो जाता है और बुलाए हुए दिन सही समय पर पहुंच जाता है प्रतियोगिता शुरू होती है,रोहन का ख्वाब बहुत करीब था उसकी सारी मेहनत का परिणाम आज दिखने वाला था यदि वो पास हो जाता है तो उसके वो सारे ख़्वाब पूरे हो जाएंगे जिसे उसने अपनी मां और परिवार के सम्मान के लिए देखा था....पर तकदीर के हिस्से में वही लिखा जाता है जो मेहनत कि कलम लिखती है प्रतियोगिता में रोहन सबसे ऊपर आता है, कंपनी वाले उसे अपने यहां रख लेते है और काफी अच्छा पैसा देते है उसे उस पोस्ट के लिए,वो कमरे पर आता है और सारी बात अपनी मां को बताता है अब मां का दिल अपने बच्चों को लेकर बहुत कमजोर होता है उनकी आंख नम हो जाती है पर ये आंसू ना ख़ुशी के थे ना ही गम के बल्कि ये गर्व के आंसू थे, कुछ दिनों रोहन ने काम किया उस कंपनी के लेखन के लिए,इसी बीच उसकी बहुत सारी किताबें प्रसिद्ध हो गई, उसे सब जानने लगे थे .....

एक दिन रोहन बोला मां चलो गांव में घूम के आते है,वो गांव जाते है उनकी ये पोजिशन देख गांव वालों की बोलती बंद हो गई,और पड़ोसी सर्मिंदगी के मारे सीधे आंख बात भी नहीं कर पाते थे,,आज रोहन के पास सब कुछ था अब गांव में शादी होती थी तो रोहन को मुख्य अतिथि की तरह सम्मान दिया जाता था,क्यूंकि जिस पोजिशन की लोग कद्र करते थे उसके पास वो सब था और गांव का क्या उस इलाक़े का सबके बड़ा आदमी बन चुका था||


निष्कर्ष (inspirational conclusion)

किसी के आज को देख कर उसके कल पर हंसना ठीक नहीं,किसी की आज की पोजिशन देख कर उसके कल वाली पोजिशन पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।।

और हां ये बिल्कुल सच है कि यदि अपने प्रतिभा, या कौशल पर भरोसा है तो ज़िद मत छोड़ो उसे निखरों और उसके शौर्य को हर तरफ फैला दो।

                           !!  धन्यवाद !!

कमी जरुरी है

Motivational thought in Hindi

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5 टिप्‍पणियां:

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