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सोमवार, 16 नवंबर 2020

ये ज़हर है | how to get out of the comfort zone?

नवंबर 16, 2020

ये ज़हर है | Motivational thoughts on comfort zone | how to get out of the comfort zone?

Comfort zone यानी आराम क्षेत्र किसे नहीं पसंद है, पर कितना आराम? और किस तरह का आराम? और यह आराम ज़हर क्यूँ बन जाता है? यह जानना आपके लिए बहुत ज़रूरी है.

comfort zone image
               how to get out of the comfort zone?


तो बने रहिए हमारे इस motivational thoughts on comfort zone के साथ जिसमें आपको ये बखूबी जवाब मिलेगा.

आखिर क्या है आराम क्षेत्र का मतलब? What is comfort zone | meaning of comfort zone?

set goal image,comfort area


अपने बच्चों को दी गई हर तरह की सुख सुविधाएँ उनके मानसिक और व्यक्तित्व को निखरने में बाधा बनती हैं? कैसे? बताता हूँ।

Simple lines में आपको समझाने की कोशिश करता हूँ, अपने यह ज़रूर सुना होगा कि “आवश्यकता आविष्कार की जननी है”.  

तो आप एक बात बताएँ आपके बच्चे को किसी खिलौने या किसी वस्तु की ज़रूरत होती है तो आप फौरन उसे ला कर देने लगते हैं.

ज़रा इस बात पर ध्यान दीजिए क्या आप उसके मानसिक स्थिति को comfort zone में नहीं रख रहे? कैसे? समझाता हूँ.

जब आपके बच्चे को खिलौना चाहिए तो, उसका दिमाग यह सोचता है कि मुझे एक खिलौना मिल जाए तो मैं बड़े आराम से खेल सकता हूँ.

अब यहाँ पर आपको एक बात का ध्यान रखना है कि, उस बच्चे को फौरन खिलौने ला कर मत दीजिए,बल्कि उस बच्चे को ये समझाने की कोशिश कीजिए या उसके दिमाग में ये massage डालिए कि,

वो और किन किन चीज़ों के साथ खेल सकता है, जब वो खिलौना नहीं पाएगा और उसे आप यह समझा देंगें कि,और भी चीज़ें हैं जिनसे खेला जा सकता है,

तो वह बच्चा अपना दिमाग उस खिलौने पर लगाने लगेगा,जिस खिलौने को वो खुद बनाने लगेगा.

इस हरकत से उस बच्चे की creativity और फोकस दोनों develop होगा, जिससे उसे comfort zone से लड़ने कि ताकत भी मिलेगी.

इन पोस्ट को भी आप पढ़ सकते हैं

How to get out of the comfort zone? आराम क्षेत्र से बाहर कैसे निकले?

1. आपके आस-पास standard down है तो अपने standard को ऊंचा रखें-

यदि आपके आस-पास के लोगों का standard down है यानी उनमें कोई discipline नाम कि चीज़ नहीं है, तो एसे लोगों में adjust होने के लिए आपको अपने सोच का standard गिरने की ज़रूरत नहीं.

बल्कि आपको एसे लोग खोजने हैं जिनकी सोच आपके सोच से मिलती हो।

2. Improve your thoughts and vision (अपने नज़रिये को बदले) -

ना व्यक्ति अच्छे कपड़े, ना ही अच्छी बात-चीत करने से सफल होता है, हाँ ये अपने जगह पर सही है पर ये external factors हैं.

जो internal factor है वो ज्यादा powerful है जिसे हम mindset या मानसिकता कहते हैं तो इस मानसिकता के नजारिएं को एक दिशा दीजिए यानी goal निर्धारित करो.

 

आप किसी का इंतजार ना करें कि कोई और improve होगा तो मैं improve करूंगा,या इस खाली जगह पर कोई कचरा नहीं फेंकेगा तब मैं भी नहीं फेंकूँगा,

यदि ऐसा सोचते रहोगे तो तुम्हारे घर के पास वाली जगह देखते देखते कचरे का ढेर बन जाएगी।

तो दोस्त याद रखो तुम्हें कोई हाथ पकड़ के समझने नहीं वाला,खुद को तलाशो और अपनी comfort zone से बाहर आकर, अपने goal की तरफ़ पूरी ताकत से दौड़ पड़ो।

 

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शनिवार, 14 नवंबर 2020

उपलब्धि नहीं,यात्रा महान होनी चाहिए | आचार्य चाणक्य (Aacharya chanakya)

नवंबर 14, 2020

सफलता की यात्रा | आचार्य चाणक्य (Aacharya chanakya)  

chanakya niti,चाणक्य
आचार्य चाणक्य नीति 


आचार्य चाणक्य के कुछ मुख्य बिन्दु जिन्हें अपनाकर आप अपनी वर्तमान स्थिति को और भी बेहतर बना सकते हैं.

एक बात याद रखो किसी भी वस्तु को पाने से कोई महान नहीं बनता,बल्कि उस वस्तु को पाने के लिए उसने कौन कौन से रास्ते अपनाए और उसमें आने वाली समस्याओं का सामना कैसे किया? यह व्यक्ति को महान बनाता है.

समझाता हूँ,

यदि व्यक्ति को सफलता पानी हो तो सबसे पहले वह एक लक्ष्य निर्धारित करता है,और फिर उसे पाने के लिए रास्ते पर निकल पड़ता है.

जब वह रास्ते में होता है तो,रास्ता उस व्यक्ति को सवारता है,निखारता है,और व्यक्ति भी रास्ते में आए सभी मुसीबतों को सुलझाते सुलझाते जो बन जाता है,वह यात्रा प्रारंभ करने वाले व्यक्ति से कहीं ज्यादा महान होता है.

क्यूंकी

यात्रा में मिले यह अनुभव ही उसके वास्तविक पूंजी है,और सफलता एक मात्र सांकेतिक स्थिति है जो यह बताती है कि,हाँ तुम इस काबिल हो।

 

कैसे शत्रु को कम सामर्थ होने के बाद भी हराएं?- आचार्य चाणक्य (Aacharya chanakya)  

युद्ध के दौरान सबसे मुख्य चीज होती है,शत्रु पक्ष की सूचनाएं और जानकारी हमे बहुत कुछ बता सकती हैं,और जब ये हमे मालूम हो जाती हैं,तो इससे हमारी योजना को बल के साथ साथ आधार और धार भी मिलता है.

युद्ध की एक नीति बहुत ही कारीगर है,और वो यह है कि,युद्ध काल के दौरान ही अपने शत्रु को यह विस्वास दिला दो की वही वास्तव में युद्ध जीत रहा है,जिससे वह निश्चिंत हो जाता है.

और जब वह निश्चिंत और असावधान हो जाए,तो उसपर आकस्मिक वार करो,परिणाम आपके पक्ष में होगा।

कम ताकत लगा के शत्रु को हराना आचार्य चाणक्य (Aacharya chanakya)  

 

यदि शत्रु से बिना युद्ध किये जितना हो तो,शत्रु के मन से यह आशा ही मिटा दो कि वह जीत भी सकता है. जिससे उसके लड़ने और जीत पाने की क्षमता में कमी आ जाती है।

ये करने के बाद,अपने पास जीतने भी संसाधन हो उसका सही से उपयोग करना है जिससे हारने की संभावना ही ना हो,उसके बाद आता है शत्रु के निर्बलता का उपयोग जिससे जीतने के लिए कम ताकत लगानी पड़े.

गुरुवार, 12 नवंबर 2020

भारतीय शिक्षा प्रणाली के बारे में | With which Mindset a student should study in the Indian education system?

नवंबर 12, 2020

किस मानसिकता के साथ एक छात्र को भारतीय शिक्षा प्रणाली में अध्ययन करना चाहिए?
With which Mindset a student should study in the Indian education system?

Indian education system
Indian education system


हमारे इस Indian education system में जब परीक्षा का परिणाम (रिजल्ट) आता है तो,कुछ बच्चे बहुत ज्यादा अंक पाये होते है तो कुछ बहुत काम अंक पाये होते हैं.

जिनका अंक ज्यादा होता है,वो तो अच्छे कॉलेज में दाखिल ले लेते है,पर जिनका कम नंबर हो उनका क्या? क्या वे बच्चे बेकार हैं? उनमें कम अक्ल है?.

यदि आप अध्यापक है,पेरेंट्स है या फिर स्टूडेंट हैं तो बने रहिए हमारे hindimotivationalstory.com ब्लॉग के साथ इसमें मैं आपको इन सारे सवालों का जवाब दूंगा.

Purpose of Education (शिक्षा का मकसद) :-

इस नंबर या अंक लाने की भाग दौड़ में जो हम भूल रहे है वो है शिक्षा का मकसद (Purpose of education).

शिक्षा का मकसद होता है हमारी मानसिकता (mindset) को इस तरह तैयार करना,कि हम अपनी लाइफ को meaningful बना सके. और इस तरह की मानसिकता बनाए कि समस्याओं को किस तरह अवसर में बदल सके।

19वीं शताब्दी के करीब भारत में इस्ट इंडिया कंपनी अपनी कंपनी सुचारु रूप से चलाने के लिए एक ट्रैनिंग सिस्टम (training system) या एजुकेशन सिस्टम इंग्लिश में स्थापित किया,

जिस सिस्टम का मुख्य उदेश्य सिर्फ और सिर्फ अपने कर्मचारियों के बीच वार्तालाप करना था,जिससे उनके मालिक की बात निचले स्तर के कर्मचारियों तक पहुँच सके.

वहाँ पर किसी idea या innovation की जरूरत नहीं थी उस सिस्टम में जो मालिक बोलता worker सिर्फ़ वही करते.

पर हमारे Indian education system में आज भी वही सिस्टम चलता आ रहा है,कुछ collages को छोड़ कर बाकी जगहों पर ना किसी idea की बात होती है ना ही किसी प्रकार के innovation की.

बस अच्छे नंबर लाओ,और कैसे भी करके नंबर लाओ।

Personality of educated person (शिक्षित व्यक्ति का व्यक्तित्व) :-

शिक्षित व्यक्ति किसे कह सकते हैं?

एक शिक्षित व्यक्ति (Educated person) का mind अपनी इन खूबियों से अच्छी तरह वाकिफ़ होता है कि मेरा……

Potential (क्षमता)

Plan of action (काम करने की योजना)

Thoughts (विचार)

Expression (भाव)

क्या है।

और ये गुण किसी किताब के अक्षर रटने से नहीं आ सकते,ये सिर्फ और सिर्फ आपके शिक्षा लेने के vision पर निर्भर है.

2017 में ASER (Annual Status Of Education Report) के अनुसार भारत में 83% छात्र रोजगार के लायक ही नहीं हैं,यानी उनमे वो बेसिक skill भी नहीं है जो उस रोजगार के लिए ज़रूरी है.सिर्फ ये छात्र डिग्री लेके घूम रहे है क्या यही एजुकेशन है?

What should we do? (हमें क्या करना चाहिए?)

creativity,innovation


यदि एक अच्छी उपलब्धि चाहिए या सफलता चाहिए तो आपका mind भी उसी तरह होना भी चाहिए यानी आपका mind,well formed mind (की मुझे क्या करना है यह आपको पता होना चाहिए) होना चाहिए,

ना की आपका mind,well filled mind (मन में सब कुछ भरा हो,कोई एक लक्ष्य ना होना) हो।

आपकी मानसिकता जितनी clear होगी की मुझे यही करना है तो,आप निश्चित उसे पा लेंगे।

Compare in Education System: - (शिक्षा प्रणाली में तुलना)

शिक्षा प्रणाली में सबसे बुरी बात यह है कि ज्यादा अंक वाले को बहुत अच्छा कहा जाता है और जिसका कम अंक हो उसे अलग नजरिए से देखा जाता है.

मानता हूँ अधिक अंक लाना ठीक है.पर एक बात बताओ यदि हम मछली को उसके पेड़ पर ना चढ़ पाने की वजह से मछली को बेकार समझे तो क्या हम सही है?

क्या हम उस मछली की सामर्थ को सही से उपयोग कर रहे हैं? नहीं ना!

तो जिस तरह मछली पेड़ पर नहीं चढ़ सकती,वो पानी में तैर सकती है यानी उसकी strength तैरना है.

उसी तरह हर छात्र अपने आप में विशेष होता है,उसे सिर्फ अपने उस skill को पहचान कर उसपर काम करना होता है।

और उसके skill के अनुसार काम करवाना पेरेंट्स और teachers का भी उतरदायित्व है.

इन्हें भी पढ़ें 

फोकस की शक्ति | Motivational thoughts & vision about power of focus

Motivational speakers in India

What Should be in Education system: - (शिक्षा प्रणाली में क्या होना चाहिए?)

भीम को गदा पसंद था,गुरु द्रोणाचार्य ने उन्हें गदाधारी बनाया, और अर्जुन को तीर धनुष पसंद था तो उनको गुरु ने उच्च कोटी का धनुर्धारी बनाया, यदि द्रोणाचार्य अर्जुन को भी बोलते तुम भी गदा सीखो तो?

शायद मुझे महाभारत में अर्जुन के योगदान की भूमिका बताने की जरूरत नहीं वो आप अच्छे से जानते है।

आज हमारे एजुकेशन सिस्टम में भी इसी तरह का सिस्टम होना चाहिए,जिसमें teachers,students की skill के अनुसार उसे educate या प्रशिक्षित करें.

यानी जो छात्र जिस क्षेत्र में ज्यादा activity रखता है उसे,उसी क्षेत्र में expert बनाए.

यदि एक जगह पर यह संभव नहीं हो तो student खुद अपनी skill के अनुसार अध्यापक और विद्यालय तलाशें और उसमें दाखिला ले।

Suggestion for parents: - (शिक्षा को लेके माता-पिता को सुझाव)

tip & tricks education


यदि student अच्छा मार्क (अंक) नहीं ला पाया,या अच्छे कॉलेज में दाखिला नहीं ले पाया तो, एक बात याद रखो यह education system या कोई मार्कशीट आपके सक्सेस या fail को निर्धारित नहीं करती।

इन सबसे ऊपर आपकी personality और आपकी skill और आपका mindset (मानसिकता) देखा जाता है.

ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पास अच्छी डिग्री नहीं,अच्छे कॉलेज में admission नहीं लिया फिर भी आज बहुत बड़े मुकाम पर है क्यूँ??

तो जवाब है अपनी skill अपने action में perfection लाके।

माता-पिता अपने बच्चे के अच्छे भविष्य की कामना करते है और चाहते हैं कि उनका बच्चा सेटल हो जाए कहीं.

पर आप पेरेंट्स से एक निवेदन है कि अपने बच्चे के mind को प्रॉब्लेम solver बनने दीजिए और बच्चे को अपने skill के अनुसार फील्ड चुनने दीजिए.

जिससे उसका passion बाहर आएगा और वह innovative बनेगा और बहुत खुश रहेगा.

 

इंडिया विश्व में जनसंख्या के आधार पर दूसरा सबसे बड़ा देश है.पर idea और creativity के आधार पर हम विश्व में 2.8% ही है.

यदि इस नंबर को बढ़ाना है तो हमे एजुकेशन सिस्टम के नजरिए को बदलना ही होगा।

 

जो इस आर्टिकल में एजुकेशन सिस्टम की बात की गई है,इससे innovation & creativity बढ़ेगी स्टूडेंट्स का stress कम होगा. और हमारा देश भी उन्नति करेगा।

 

पर छात्रों को भी यह बात याद रखना है,सिर्फ और सिर्फ आप अपने skill पर ही काम करें,किसी के position या status को देख कर उनके जैसा बनने की कोशिश ना करें.

क्यूंकी इस काम में आपको काम करने के लिए बल लगाना पड़ेगा,पर यदि आप अपने passion या skill पर काम करेंगे तो यह बल स्वतः ही आपका सहयोग करेगा।

 

निवेदन- यदि आपको हमारा यह इंडियन एजुकेशन सिस्टम के ऊपर आर्टिकल पसंद आया हो तो आप अपने मित्रों के साथ इसे शेयर करें।


साथ ही ये कुछ बेहतरीन motivational पेज हैं

Motivational shayari in hindi : मोटिवेशनल शायरी

जंगल में असहाय आदमी/hindi motivational story for students

                           

                                ||धन्यवाद||

शुक्रवार, 6 नवंबर 2020

इसमे मज़ा है! (A short motivational story in hindi)

नवंबर 06, 2020

इसमे मज़ा है! (A short motivational story on goal)

इस motivational कहानी का मुख्य उद्देश्य आपके goal (लक्ष्य) के बीच में आने वाली सबसे बड़ी बाधा का निवारण है,जिसे आपको 20-30 वर्ष की उम्र में जानना बहुत ही ज़रूरी है।

Goals क्या है

G- Golden

O- Opportunities

A- Allowing

L- Large

S- Successes.

goal setting image
hindimotivationalstory.com


यानी सुनहरे अवसर बड़ी सफलताओं की अनुमति देते हैं। तो आज एक पहल लक्ष्य (goal) की तरफ़। 

कहानी शुरू करते हैं-

22 वर्षीय रवि रास्ते पर जाते हुए एक उद्योगपती को देखता है तो उसके मन में एक ख्याल आता है,अरे वाह! इस आदमी की तो ज़िंदगी कितनी मस्त है,ये तो अपने सारे शौक पूरा करता होगा,मुझे भी इसी तरह एक बड़ा आदमी बनना है ताकि मेरे पास भी खूब पैसा हो।

वो ऐसा सोच के अगले कुछ सालों तक बहुत मेहनत करता है,और उसके पास अच्छे खासे पैसे हो जाते है वो बड़ा खुश था,एक दिन वो एक साधु के आश्रम में जाता है और साधु के बातों को सुन रहा होता है साधु महराज की बात सुनते हुए उसने सोच कि,ये तो एकदम अलग बैठे है और मैं नीचे भीड़ में बैठा हूँ और सारे लोग भी नीचे हैं,

साधु महाराज को कितना अच्छा महसूस होता होगा,मैं भी ये अनुभूति चाहता हूँ की, वहाँ से जाने के बाद रवि वेद पुराण और सत्संग में भाग लेने लगा कुछ दिन हुए ही थे की,उसकी मुलाकात एक गायक से हो जाती है जिसका नाम बहुत प्रसिद्ध था, फिर क्या हमारे हीरो रवि शाहब गायक बनने की ठान ली,

अब रवि बाबू की उम्र 40 वर्ष के करीब थी उसने जब खुद को तलाशने की कोशिश की,कि आखिर मैंने कौनसे मुकाम पाये तो नया ही उसने खुद को एक धनवान व्यक्ति पाया,ना ही एक बहुत अच्छा ज्ञानी और ना ही एक विख्यात गायक….वजह क्या है यह आप अच्छे से जानते हो।

निष्कर्ष (conclusion) - रवि के पास आज एक कोई भी ऐसी skill (कला) नहीं है जिसमें वो खुद को बेहतरीन कह सके,तो क्या उसने मेहनत नहीं की?? क्या उसने अपनी ऊर्जा नहीं लगाई?? नहीं उसने मेहनत भी किया और ऊर्जा भी लगाई पर उसने अपना फोकस बिगाड़ दिया,

क्यूंकी पारंगता (expertise) single focus mindset मांगती है,यानि यदि आपको गायक बनना है तो दुनियाँ के सारे अवसर को एक कोने में बंद करके सिर्फ और सिर्फ आपको गायक के लिए ही तैयारी करनी है,सिर्फ और सिर्फ यही एक मात्र सफलता का राज़ है।

focus on goal
Focussed


क्यूंकी बिना goal (लक्ष्य) निर्धारित किये आपकी ज़िंदगी एक बिना डोर की पतंग की तरह होती है जिसे हवा कहीं भी गिरा सकती है किसी कीचड़ में या किसी कुएं में।

अब आगे मर्जी आपकी ।

ये कुछ और भी बेहतरीन कहानियाँ हैं जिन्हें आप पढ़ सकते हैं….

 

जंगल में असहाय आदमी

क्या सच मे हार गए हो??

motivational speech in Hindi before you regret

निवेदन- आशा करता हूँ यह motivational story on goal (लक्ष्य पर आधारित प्रेरक कहनी) आपको पसंद आई होगी तो आप इसे शेयर कर सकते हैं,मैं आपके सफलता की कामना करता हूँ।

 

                               ||धन्यवाद||

ये ज़हर है | how to get out of the comfort zone?

ये ज़हर है  | Motivational thoughts on comfort zone | how to get out of the comfort zone? Comfort zone   यानी आराम क्षेत्र किसे नहीं पस...